Description
‘हिंदी आलोचना कोश’ जन्म- वर्षानुसार सन 1844 (बालकृष्ण भट्ट) से वर्तमान समय तक के आलोचकों की आलोचकीय दृष्टि का कोश है। यह अध्येताओं के लिए आलोचना पर एक विशद ग्रन्थ है। यह दस खण्डों में प्रस्तुत है। सहज शब्दों में कहें तो आलोचना किसी भी कार्य-व्यापार में एक विवेकपूर्ण हस्तक्षेप है। पर प्रश्न यह भी उठ सकता है कि दूसरों के कार्य व्यापार में ‘हस्तक्षेप’ क्यों? सहज उत्तर होगा, हमारी समझ में यदि कोई व्यक्ति गलत कार्य करते दिखाई देगा तो एक समझदार व्यक्ति उसे अपने सुतर्क द्वारा समझाने की चेष्टा करेगा। यह स्वाभाविक मानव स्वभाव है। सब लोग तो नहीं, पर कुछ लोग ऐसे होते हैं कि दूसरों को विचलित होते देख ही नहीं सकते। अतः वे ऐसी परिस्थिति में समाने आकर ‘हस्तक्षेप’ करते हैं। साहित्य जगत में भी ठीक यही प्रक्रिया काम करती है। साहित्य का अध्ययन-मनन करने वाले सामान्यतः दो तरह के व्यक्ति होते हैं। इसी प्रक्रिया को आलोच्य दृष्टि से देखते हुए आलोचकों ने जो विचार व्यक्त किए हैं, ‘हिंदी आलोचना कोश’ उनका संपुट है।









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