Description
‘अपनी और अपनों की नज़र में मैं’ में डॉ. धर्मपाल सिंह ने अपने जीवन के संघर्षों, अनुभवों, मूल्यों और आत्मीय संबंधों का अत्यंत संवेदनशील एवं आत्मविश्लेषणात्मक चित्र प्रस्तुत किया है। यह आत्मकथात्मक कृति केवल लेखक के व्यक्तिगत जीवन-वृत्तांत तक सीमित नहीं रहती, बल्कि परिवार, समाज, शिक्षा, अध्यात्म, कृतज्ञता और मानवीय मूल्यों के विविध आयामों को भी उजागर करती है। लेखक ने अपने जीवन-निर्माताओं, परिजनों तथा शुभचिंतकों के योगदान को विनम्रता से स्वीकार करते हुए यह दिखाया है कि साधारण परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प, अनुशासन और सकारात्मक दृष्टि के सहारे असाधारण उपलब्धियाँ प्राप्त की जा सकती हैं। आत्मीय संस्मरणों और प्रेरक प्रसंगों से समृद्ध यह पुस्तक नई पीढ़ी सहित सभी पाठकों को जीवन के प्रति आशावादी, मूल्यनिष्ठ और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा प्रदान करती है।






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