Description
जैसे युद्ध और हिंसा का अभिन्न संबंध है वैसे ही ‘हिंसा’ और ‘शब्द’ का शाश्वत विरोध। प्रसिद्ध विचारक ज्याँ पाल सार्त्र ने शब्द को हिंसा का विकल्प कहा है। जब शब्द-संवाद की शक्ति समाप्त होती है तब हिंसा का प्रारंभ होता है। संवेदनशील कवि-लेखक शब्द की सत्ता में विश्वास रखते हैं, अतः वे युद्धों के विरोध में अपने को व्यक्त करते रहेंगे। उपनिषदों से लेकर आज तक वे यही करते रहे हैं और कहना न होगा कि संसार में आज जो कुछ भी सौंदर्य बचा है उसमें उनकी रचनात्मक भूमिका असंदिग्ध है। हिंदी के युवा कवि कुमार अनुपम ने विश्व कविता से युद्ध के विरोध में लिखी गई कविताओं का यह वृहत् चयन संलग्नता से तैयार किया है। यह भी हिंसा के विरुद्ध एक रचनात्मक प्रयास है। – विश्वनाथ प्रसाद तिवारी







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