Description
बनारस को सिर्फ़ देखा नहीं जाता, चखा, सुना और महसूस किया जाता है। घाटों पर गंगा की लहरों में सदियों की स्मृतियाँ हैं, गलियों में घंटियों की गूँज है और किसी अनजान मोड़ पर उठती कचौड़ी की खुशबू अचानक आपको अपने ही अतीत तक पहुँचा देती है। यह शहर जितना बाहर दिखाई देता है, उससे कहीं अधिक भीतर बसता है। बनारस में स्वाद केवल स्वाद नहीं–एक स्मृति है। किसी पकवान में दादी के हाथों की गर्माहट है, किसी मिठाई में माँ की रसोई की महक, किसी व्रत के फलाहार में श्रद्धा है और किसी त्योहार की थाली में पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा।
काशी में कहा जाता है, ‘सात वार, तेरह त्योहार।’ यहाँ त्योहार कैलेंडर पर नहीं आते; वे घरों की रसोई, आँगन, घाट और लोकस्मृतियों में पहले से मौजूद रहते हैं। सावन से दीपावली तक, जन्माष्टमी से नवरात्र तक–हर पर्व अपने साथ एक स्वाद, एक रस्म और एक कहानी लेकर आता है।








Reviews
There are no reviews yet.