Description
‘अधूरी देह का दंश’ प्रो. दीपिका विजयवर्गीय एवं डॉ. आरती पाठक द्वारा संपादित एक महत्त्वपूर्ण वैचारिक संकलन है, जिसका प्रकाशन सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली द्वारा वर्ष 2026 में किया गया है। यह पुस्तक भारतीय समाज में किन्नर समुदाय की सामाजिक स्थिति, अस्मिता, संघर्ष, पीड़ा और अधिकारों से जुड़े प्रश्नों को संवेदनशीलता तथा आलोचनात्मक दृष्टि से प्रस्तुत करती है। इसमें स्थापित साहित्यकारों के विचारों, किन्नर समुदाय के आत्मकथ्य एवं जीवनानुभवों तथा समीक्षकों के विश्लेषण के माध्यम से किन्नर विमर्श के विविध आयामों को सामने लाया गया है। पुस्तक परिवार और समाज द्वारा बहिष्कार, शिक्षा एवं रोजगार के सीमित अवसरों, सामाजिक भेदभाव, आर्थिक सशक्तीकरण तथा समान नागरिक अधिकारों जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर विचार करती है। इसकी विशेषता यह है कि यह किन्नर समुदाय को केवल सहानुभूति का पात्र मानने के बजाय समान अधिकार, सम्मान और सामाजिक सहभागिता का अधिकारी मानने की दृष्टि विकसित करती है। यह संकलन रूढ़ियों और पूर्वाग्रहों को चुनौती देते हुए पाठकों को अपनी सामाजिक मानसिकता का आत्मनिरीक्षण करने के लिए प्रेरित करता है। साहित्य, समाजशास्त्र, जेंडर अध्ययन और मानवाधिकार के क्षेत्र में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक विशेष रूप से उपयोगी है।






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