Description
‘समकालीन कला की समझ और संभावनाएँ’ राकेश कुमार दिवाकर द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण कृति है, जो आधुनिक कला के जनतंत्रीकरण और उसे आम जनता से जोड़ने की गहरी आकांक्षा को व्यक्त करती है। इस पुस्तक में लेखक ने कला को केवल कला दीर्घाओं तक सीमित न रखकर उसे समाज के शोषित और पीड़ित वर्ग की मुक्ति का माध्यम बनाने का स्वप्न देखा है। यह संग्रह दिवाकर के कला-चिंतन का जीवंत दस्तावेज़ है, जिसमें उन्होंने कला और साहित्य के बीच की दूरी को मिटाते हुए मानवीय संघर्षों, सामाजिक विषमताओं और सुंदर भविष्य की उम्मीदों को रेखांकित किया है। पुस्तक में उनके स्वयं के कलात्मक सफर के साथ-साथ 42 अन्य समकालीन कलाकारों की कला और उनके जीवन संघर्षों का भी समावेश है, जो भारतीय कला जगत को एक नई और सार्थक दिशा प्रदान करने का प्रयास करती है।






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