Description
प्रो. अखिलेश चन्द्र का कहानी-संग्रह ‘रेहन पर खेत’ भारतीय समाज, विशेषकर ग्रामीण और मध्यमवर्गीय जीवन की जटिलताओं, संघर्षों और संवेदनाओं का अत्यंत मार्मिक एवं यथार्थपरक चित्र प्रस्तुत करता है। यह संग्रह मुंशी प्रेमचंद की मानवीय संवेदना और सामाजिक यथार्थ की परंपरा को समकालीन संदर्भों में नए अर्थ और नई दृष्टि के साथ आगे बढ़ाता है। संग्रह की शीर्षक कहानी ‘रेहन पर खेत’ एक किसान की उस गहरी पीड़ा को अभिव्यक्त करती है, जिसमें पुश्तैनी ज़मीन को रेहन रखना केवल आर्थिक विवशता नहीं, बल्कि अपनी पहचान, स्वाभिमान और अस्तित्व के एक हिस्से को खो देने जैसा त्रासद अनुभव बन जाता है।






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