Description
‘रंगमंच के राम’ सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्याम नारायण गुप्त द्वारा रचित एक महत्त्वपूर्ण काव्य-नाटक है, जिसमें भगवान श्रीराम की दिव्य जीवन-यात्रा को रंगमंचीय प्रस्तुति की दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली ढंग से रूपायित किया गया है। अठारह अंकों में विभाजित यह कृति विश्वामित्र के अयोध्या आगमन से लेकर रावण-वध तक की समग्र रामकथा को छंद, पद और गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पूरे नाटक में गद्य का प्रयोग नहीं किया गया है; प्रत्येक संवाद काव्यात्मक शैली में रचा गया है, जिससे मंचन अधिक जीवंत, संगीतमय और भावप्रवण बनता है। लेखक का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि श्रीराम के आदर्शों, सनातन सांस्कृतिक मूल्यों तथा भक्ति-भाव को जन-जन तक पहुँचाना है। मंचीय आवश्यकताओं और स्थानीय परंपराओं को ध्यान में रखकर लिखी गई यह कृति रामलीला एवं नाट्य-मंचन से जुड़े कलाकारों, साहित्यप्रेमियों और रामकथा के अध्येताओं के लिए समान रूप से उपयोगी एवं संग्रहणीय है।






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