Description
दयानंद पांडेय द्वारा रचित तथा डॉ. ओमप्रकाश सिंह द्वारा भोजपुरी में अनूदित उपन्यास ‘बाँसगाँव की मुनमुन’ समकालीन ग्रामीण और कस्बाई भारतीय समाज के बदलते पारिवारिक एवं सामाजिक यथार्थ का सशक्त आख्यान है। यह कृति केवल मुनमुन नामक एक स्त्री के संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि टूटते पारिवारिक मूल्यों, बढ़ते स्वार्थ, रिश्तों में आती दरारों और बदलती स्त्री चेतना का संवेदनशील दस्तावेज़ भी है। उपन्यास में निम्न-मध्यवर्गीय जीवन की विडंबनाएँ, पीढ़ियों के बीच का द्वंद्व, संपत्ति और प्रतिष्ठा की लालसा से उत्पन्न तनाव तथा अकेले होते जा रहे मनुष्य की पीड़ा को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।






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