Description
मणिकर्णिका डॉ. जयति ओझा का एक संवेदनशील और चिंतनपरक काव्य-संग्रह है, जिसमें जीवन, मृत्यु, प्रेम, स्त्री-अस्मिता, आत्मबोध तथा आध्यात्मिक चेतना के विविध आयाम अत्यंत मार्मिकता के साथ अभिव्यक्त हुए हैं। बनारस के मणिकर्णिका घाट को प्रतीक बनाकर कवयित्री ने जीवन की नश्वरता, आत्मा की अनश्वरता और मनुष्य के आंतरिक संघर्षों को गहन दार्शनिक दृष्टि से देखा है। संग्रह की कविताएँ केवल भावनात्मक अभिव्यक्ति नहीं हैं, बल्कि आत्मानुभूति, सामाजिक यथार्थ और स्त्री-स्वातंत्र्य की सशक्त व्याख्या भी प्रस्तुत करती हैं। सहज, प्रवाहमयी और बिंबसमृद्ध भाषा में रचित ये कविताएँ पाठक को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती हैं तथा उसे जीवन के गहरे प्रश्नों से साक्षात्कार कराती हैं।






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