Description
‘किशोर चंद्रिका’ बाबू वैद्यनाथ किशोर साही द्वारा रचित एक विशिष्ट काव्य-संग्रह है, जिसे भारतीय छंद-परंपरा का एक जीवंत दस्तावेज माना जाता है। इस ग्रंथ में ब्रजभाषा की मधुर अभिव्यक्ति के साथ कवित्त, सवैया, दोहा, और चित्रकाव्य जैसे विविध छंदों का अत्यंत कलात्मक और प्रभावशाली प्रयोग किया गया है। इसमें ईश्वर-वंदना से लेकर प्रकृति, ऋतुओं, नीति और मानवीय संबंधों का व्यापक चित्रण मिलता है। मूल रूप से वर्ष 1913 में प्रकाशित यह दुर्लभ कृति न केवल अतीत की साहित्यिक गरिमा का परिचय देती है, बल्कि आज के शोधार्थियों के लिए पुरानी हिंदी के क्रमिक विकास को समझने हेतु एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ भी है।






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