Description
साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष, वरिष्ठ कवि, आलोचक और नवगीतकार माधव कौशिक का नवगीत-संग्रह ‘सपने तक जलमग्न हुए’ समकालीन नवगीत परंपरा की संवेदनात्मक गहराई और वैचारिक सजगता का महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ है। इस संग्रह के नवगीतों में निजी स्वप्न और सामाजिक यथार्थ एक-दूसरे में इस तरह घुलते हैं कि गीत केवल भावुक अभिव्यक्ति न रहकर समय का साक्ष्य बन जाते हैं। जल, सपना और डूबन जैसे प्रतीक यहाँ केवल सौंदर्य के उपकरण नहीं, बल्कि मनुष्य की असुरक्षा, टूटते विश्वास और निरंतर संघर्ष की अनुभूति के संवाहक हैं। माधव कौशिक की भाषा सधी हुई, लयात्मक और अर्थगर्भित है, जो नवगीत की परंपरागत कोमलता को समकालीन चिंताओं से जोड़ती है। आलोचक दृष्टि और कवि-संवेदना के संतुलन से रचा गया यह संग्रह नवगीत को आत्मानुभूति से आगे ले जाकर सामाजिक विवेक का माध्यम बनाता है और इसी कारण यह कृति पाठक और आलोचक—दोनों के लिए विशेष महत्व रखती है।






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