He’s 101, Unless He’s Only 98. And He Just Wrote Another Novel

WESTPORT, Conn. — A.E. Hotchner, the man who was everybody’s best friend — Ernest Hemingway’s, anyway, and Paul Newman’s — wrote his latest book in longhand. He did not let his wife, Virginia Kiser, read the manuscript as he went along. She would peek over his shoulder, or try to. He would cover the words […]

लघुकथाएं ‘फिलर’ नहीं ‘पिलर’ – सुरेश कुशवाह तन्मय

भोपाल के दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि सभागार में लघुकथा शोध केंद्र भोपाल द्वारा “लघुकथा टाइम्स” मासिक समाचार पत्र के दूसरे अंक के लोकार्पण एवं लघुकथा गोष्ठी में सुरेश कुशवाह तन्मय ने कहा कि वर्तमान समय में लघुकथा साहित्य की अन्य विधाओं की तुलना में आज तेजी से लोकप्रिय हुई है। इस अवसर पर डॉ. मोहन तिवारी […]

 ହାଇକୁ

ପ୍ରଦୀପ କୁମାର ଦାଶ “ଦୀପକ” 01 ହୃଦୟ ଯନ୍ତ୍ର ପ୍ରେମ ବିନା କାହିଁକି ଭାରି ଦୁଃଖିତ । 02 ପୁନେଇଁ ଜହ୍ନ ନଦୀର କୁଳୁ କୁଳୁ ଦେଖାଏ ସ୍ୱପ୍ନ । 03 ତୃଷ୍ଣା ବିସ୍ତୃତ କିନ୍ତୁ କର୍ମର ଫଳ ମିଳେ ସମ୍ଭାର । 04 ଗଛ ଫାଙ୍କରେ ସେ ଫାଳିକିଆ ଜହ୍ନ ହେଳା ମଗନ । 05 ତମ କୁନ୍ତଳ ଚମକାଏ ବିଜୁଳି କଳା ବାଦଲ । 06 ବଉଳ ଫୁଲ ହୃଦୟ ହଜିଯାଏ ଗାଁ ନଇ […]

अन्तर्मन का दर्पण

राजेश पुरोहित सांसें गिनती की होती है इन्हें पल पल संभालिए रखिये इन पर पैनी नज़र इनका मोल पहचानिए अन्तर्मन का दर्पण है ये बस इनको ही सवांरिए व्यर्थ न जाने पाए साँसे हर पल ओम में गुजारिए चार दिन का खेल जिंदगी मौज के साथ इसे गुजारिए परहित से बड़ा न काम कोई बस इतना […]

परुली

        -नीलम पांडेय नील परूली (लघुकथा) दिल नी टुट विक , बस जरा सी थेची गो छी । परू हर बखत परूली की धुन में रनेर हई  तब कतु  बार चलते चलते घुरी जनेर हई  ।  विक त अघिल लै परूली,और पछिल लै परूली दिखनेर हई । अब तौं बाकर चराण मलै […]

A parrot with  his sky

A parrot with  his sky  * Kalpana Bhatt A parrot from his would look outside towards the blue sky and wandering clouds .He would move inside it to explore the sky as much as he could as he could see only a limited part of it . It would always attract him .He wanted to […]

Of How

Of How   – Khwaish Gupta As zephyr hit my face today, I was but swayed to be reminded of you. Of how, dancing in the wind, you yearned to reach the heaven. Of how, against the strongest of gales, you struggled to live. Deemed to be worth it. Of how, you alighted in the […]

Sarv Bhasha Trust

साहित्य शिरोमणि विद्यानिवास मिश्र

(14 जनवरी/जन्म-दिवस) भारतीय साहित्य और संस्कृति की सुगन्ध भारत ही नहीं, तो विश्व पटल पर फैलाने वाले डा. विद्यानिवास मिश्र का जन्म 14 जनवरी, 1926 को गोरखपुर (उ.प्र.) के ग्राम पकड़डीहा में हुआ था। इनके पिता पंडित प्रसिद्ध नारायण मिश्र की विद्वत्ता की दूर-दूर तक धाक थी। इनकी माता गौरादेवी की भी लोक संस्कृति में […]

कलम

जब विचार कविता का आकार लेने लगते हैं, तब कलम होकर पैनी, तलवार बनने लगती है, बगैर एक बूंद रक्त बहाये, अपना काम करने लगती है।। जब जुल्म – सितम की आँधियां कहर ढाने लगती हैं, तब किताबें ढ़ाल बनकर सुरक्षा देने लगती हैं, द्वार प्रगति के खोलकर,गुलामी की बेडियां तोडने लगती हैं।। तुम पढ़ो […]

युवा प्रेरणा के अक्षय स्रोत विवेकानंद

जब आदर्श व्यक्तियों की बात आती है तब मेरे मानस पटल पर एक साथ कई चित्र उभरते हैं। दुष्टों का संहार करने के लिए धनुष-धारण किये हुए मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और अक्षय मुस्कान के धनी कुवलय तथा गुंजाओं से सुशोभित, चारु वेणु-वाद करते श्रीकृष्ण का भी। परन्तु जब ऐतिहासिक महापुरुषों की ओर देखता हूँ […]