ग़ज़ल

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सोच रहा हूँ दोस्त हमारा भी तो है इंसानों में कितना ज़हर छुपा रखा है होठों के मुस्कानों में कुंभकार का चाक देखकर मन बोझिल हो जाता है जाने क्या-क्या दिख जाता है मिट्टी के सामानों में शमा रौशन होते ही ये कहाँ-कहाँ से आ जाते जल जाने की चाहत इतनी होती क्यों परवानों में […]

ग़ज़ल

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वो इस कदर बरसों से मुतमइन* है जैसे बारिश से बेनूर कोई ज़मीन है साँसें आती हैं, दिल भी धड़कता है सीने में आग दबाए जैसे  मशीन है आँखों में आखिरी सफर दिखता है पसीने से तरबतर उसकी ज़बीन* है अपने बदन का खुद किरायेदार है खुदा ही बताए वो कैसा मकीन* है ज़िंदगी मौत […]

हिन्दी दिवस समारोह में पुस्तक विमोचन परिचर्चा आ कविता के सरिता बहल

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आजु 14 सितंबर संझा हिन्दी दिवस का उपलक्ष में “सुभाष वादी समाजवादी पार्टी गाजियाबाद” का कार्यालय पर “हिन्दी: कल आज और कल” पर परिचर्चा आ काव्यगोष्ठी के भव्य आयोजन सम्पन्न भइल, जवना में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक श्री वास्तव जी समारोह अध्यक्ष रहलें आ अभिनंदन तिवारी जी कार्यक्रम के अध्यक्षता कइलें।प्रमुख वक्ता कवि और लेखक आदरणीय मोहन […]

मैं हिंदी हूँ

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एक दिन का पर्व नहीं मैं तो युगों का गर्व हूँ, बचपन की किलकारी से मां की लोरी तक, अलौकिक प्रेम के अनकहे शब्द हूँ। मां की चिंता हूँ ,पिता का दुलार हूँ, भाई का आश्वासन ,बहन का संसार हूँ। मैं एक भाषा नही मैं तो एक परिवार हूँ। मैं वह संपर्क हूँ जो मन […]

हिन्दी कै

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सुर-ताल आ चाल बदल के ठाँव बतावें हिन्दी कै॥ सत्तर सांतर बत्तीस बेंवत भाव बतावें हिन्दी कै ॥   जे जे जान लगवलस एहमे सभके मान जगवलस एहमे ओकरै छाती दाल दरै के दाँव बतावें हिन्दी कै ॥   सबके माल मलाई आपन मीटिंग सिटिंग संगे ज्ञापन लोक राग भाषा बोली कै नाँव बतावें हिन्दी […]

हिंदी से कैसा द्वेष?

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राग-रंग की भाषा हिंदी सक्षम-अक्षम की आशा हिंदी हिंदी सबकी शान है हिंदी से हिन्दुस्तान है मेरे गाने से क्योंकर क्लेश है? हिंदी फैली दूर तलक ईर्ष्या -द्वेष क्यों नाहक इसका अपना इतिहास पुरातन पूजता रहता इसको जन-मन विस्मित सारा परिवेश है। हिंदी ने किसी से बैर न माना जो आया उसे अपना जाना सबको […]

देश की पीढ़ी नयी तैयार करता हूँ

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देश की पीढ़ी नयी तैयार करता हूँ । इस तरह मैं स्वयं का उद्धार करता हूँ । जो कभी उड़के गगन को छू नहीं पाते, उन परिंदों के परों में धार करता हूँ । टिमटिमाये ही बिना जो डूब जाते कल, उन सितारों से जहां उजियार करता हूँ । फूल, जो जाते बिखर वनफूल-सा, उनका […]

समाज को दिशा दिखाती कविताओं का संकलन : अतीत के झरोखे से

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डॉ. किरण सोनी जी एक सफल एवं लोकप्रिय अध्यापिका हैं। कवियत्री तो वह बचपन से ही हैं क्योंकि बाल्यकाल से ही कविता लेखन कर रही हैं यह अलग बात है कि पाठकों के बीच उनकी कविताएं पहली बार इस कविता संग्रह ‘अतीत के झरोखे से’ के माध्यम से पहुँच रही हैं। किरण जी की भाषा […]

हम टीचर हईं

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लोग हमरा के धरती पर बोझा कहेला अब त अति हो गइल भाई अन्हें ना मुँहवे के सोंझा कहेला तबो हम कहत बानी मथमहोर ना हईं हमरो आपन पहचान बा कवनो चोर ना हईं। हमार इतिहास बहुत पुरान बा हमरे कारण अर्जुन, कर्ण, एकलव्य, चन्द्रगुप्त, अशोक आदि के पहचान बा जी भाई हम टीचर हईं […]

विविधता पूर्ण ग़ज़ल-संग्रह : साथ गुनगुनायेंगे

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श्री आर.डी.एन. श्रीवास्तव जी द्वारा प्रस्तुत गजल संग्रह ‘साथ गुनगुनाएंगे’ सरल हिंदी उर्दू मिश्रित भाषा में लिखी हुई गजलों का संग्रह है जिसे पाठकों के लिए और भी सरस बनाने के लिए लेखक ने बीच-बीच में अंग्रेजी के शब्दों का प्रयोग करने से भी परहेज नहीं किया है । मौलिक रूप से ग़ज़ल का प्रयोग […]