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म्हारै गाँव

शहरां रा धुँवा में बळता मिनखं भाजा-दौड़ी मोकळो,अनाप-सनाप पइसौ मिनखां रौ बैरी जीवतौ खावै पण इणनै कुंण बतावै जलमियां रै पसै उणमें ही ढुल जावै भर-भर बौरंया घर-घर मांय ल्यावै पण उणनै कुंण समझावै पगां-पोतियां,पुरखां नै भूल जावै बूढाँ नै टाइम पर बाटी नी दैवे छोड़ सगळो काज भांत भांत रा सीरियाला मांय आंखिया गाळे […]