Literature

What does banning a book mean today?

Freedom of expression is essential. Freedom is essential and expression, likewise, too. Freedom gives birth to expression. Expression strengthens freedom. Freedom magnifies expression. In literature, too, freedom is essential. Without a free mind, no literary artists can draw his or her art with letters! Often, these modern days, we come to know various news how […]

Book Review : A Thousand seeds of Joy

Title: A Thousand Seeds of Joy Author: Ananda Karunesh Publisher: The Write Place Year: 2018 Page Count: 370 Rating: 5/5 Review by Amit for Literature News Men have been men and women have been women except for those aligned moments of the stars when people exchanged the roles – devis killing asuras and devtas invoking […]

अंतरराष्ट्रीय सेमिनार

अंतरराष्ट्रीय सेमिनार ‘वर्तमान समस्याएं और लोक की भूमिका’ विषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 23,24 नवंबर ,2018 को उत्तर वाहिनी गंगा के तट पर स्थित स्वामी सहजानंद पी जी कॉलेज गाज़ीपुर(बनारस) में होना है। यदि 5 नवंबर तक शोध सारांश और शोध पत्र आ जाए तो आईएसबीएन नंबर की पुस्तक में उसको जगह भी मिल जाएगी तथा उसका […]

DATES FOR THE LITERARY CALENDAR (Sep. To Nov. 2018)

Here’s a bit of help with all the important literary dates for your calendar. We’ve focused mainly on dates for the UK except some internationally significant book prizes. For those events where dates between September to November 2018 – September 13th – Man Booker short-list (2017, date for 2018 TBC) 13th – Roald Dahl Day […]

 ହାଇକୁ

ପ୍ରଦୀପ କୁମାର ଦାଶ “ଦୀପକ” 01 ହୃଦୟ ଯନ୍ତ୍ର ପ୍ରେମ ବିନା କାହିଁକି ଭାରି ଦୁଃଖିତ । 02 ପୁନେଇଁ ଜହ୍ନ ନଦୀର କୁଳୁ କୁଳୁ ଦେଖାଏ ସ୍ୱପ୍ନ । 03 ତୃଷ୍ଣା ବିସ୍ତୃତ କିନ୍ତୁ କର୍ମର ଫଳ ମିଳେ ସମ୍ଭାର । 04 ଗଛ ଫାଙ୍କରେ ସେ ଫାଳିକିଆ ଜହ୍ନ ହେଳା ମଗନ । 05 ତମ କୁନ୍ତଳ ଚମକାଏ ବିଜୁଳି କଳା ବାଦଲ । 06 ବଉଳ ଫୁଲ ହୃଦୟ ହଜିଯାଏ ଗାଁ ନଇ […]

अन्तर्मन का दर्पण

राजेश पुरोहित सांसें गिनती की होती है इन्हें पल पल संभालिए रखिये इन पर पैनी नज़र इनका मोल पहचानिए अन्तर्मन का दर्पण है ये बस इनको ही सवांरिए व्यर्थ न जाने पाए साँसे हर पल ओम में गुजारिए चार दिन का खेल जिंदगी मौज के साथ इसे गुजारिए परहित से बड़ा न काम कोई बस इतना […]

परुली

        -नीलम पांडेय नील परूली (लघुकथा) दिल नी टुट विक , बस जरा सी थेची गो छी । परू हर बखत परूली की धुन में रनेर हई  तब कतु  बार चलते चलते घुरी जनेर हई  ।  विक त अघिल लै परूली,और पछिल लै परूली दिखनेर हई । अब तौं बाकर चराण मलै […]

Sarv Bhasha Trust

साहित्य शिरोमणि विद्यानिवास मिश्र

(14 जनवरी/जन्म-दिवस) भारतीय साहित्य और संस्कृति की सुगन्ध भारत ही नहीं, तो विश्व पटल पर फैलाने वाले डा. विद्यानिवास मिश्र का जन्म 14 जनवरी, 1926 को गोरखपुर (उ.प्र.) के ग्राम पकड़डीहा में हुआ था। इनके पिता पंडित प्रसिद्ध नारायण मिश्र की विद्वत्ता की दूर-दूर तक धाक थी। इनकी माता गौरादेवी की भी लोक संस्कृति में […]

कलम

जब विचार कविता का आकार लेने लगते हैं, तब कलम होकर पैनी, तलवार बनने लगती है, बगैर एक बूंद रक्त बहाये, अपना काम करने लगती है।। जब जुल्म – सितम की आँधियां कहर ढाने लगती हैं, तब किताबें ढ़ाल बनकर सुरक्षा देने लगती हैं, द्वार प्रगति के खोलकर,गुलामी की बेडियां तोडने लगती हैं।। तुम पढ़ो […]

सर्व भाषा ट्रस्ट

गणेश चौथ पर भेड़ा काटना

माघ मास का गणेश चौथ। गणपति बप्पा मोरया कह कर मूर्ति विसर्जित करने वाला नहीं, माघ के कृष्ण पक्ष का गणेश चतुर्थी व्रत। थोड़ा क्या, स्नातक पास करने और परास्नातक में लोक-साहित्य पढ़ते समय पता चला कि इस व्रत को संकट चौथ भी कहा जाता है। संकट चौथ का यह त्योहार माघ के कृष्ण चतुर्थी […]