Kumauni

परुली

        -नीलम पांडेय नील परूली (लघुकथा) दिल नी टुट विक , बस जरा सी थेची गो छी । परू हर बखत परूली की धुन में रनेर हई  तब कतु  बार चलते चलते घुरी जनेर हई  ।  विक त अघिल लै परूली,और पछिल लै परूली दिखनेर हई । अब तौं बाकर चराण मलै […]