Hindi

हिन्दी है जन-जन की भाषा

संदर्भ:- 14 सितम्बर ,हिन्दी दिवस महात्मा गांधी ने कहा था “ह्रदय की कोई भाषा नहीं है। ह्रदय ह्रदय से बातचीत करता है। और हिंदी ह्रदय की भाषा है। “हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी ऐसे महत्वपूर्ण निर्णय को 14 सितम्बर 1949 को लिया गया था। हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित एवम प्रचारित करने के […]

लोकतंत्र और महात्मा गाँधी

       महात्मा गाँधी के विचार लोकतंत्र के लिए एक रीड के समान थे | गांधीजी ने उस समय ये विचार पूरी शक्ति से अंग्रेजो के सामने रखे की भारत को लोकतंत्र के रूप में ही चलाया जा सकता है और किसी भी हुकूमत को भारत की जनता मानने को तैयार नहीं है | […]

नेताजी और जनता

नेताजी का भ्रमण था हो रहा हल्ला था लोग अपनी समस्या बता रहे थे नेताजी सबका हल दे रहे थे नेताजी मैं बेरोजगार हूँ। मेरी नैया पार लगाओ। बेटा , तेरे पास मोबाइल कौनसा है कीपैडवाला जमाना बदल गया बेटा एनरॉईड मोबाइल खरीद नैया ते्री मोबाइल में अटकेगी अौर बेरोजगारी दिखाई ही न देगी नेताजी […]

मेरी कविता’ -2

लाख चाहने पर भी घर नहीं ला पाता खुशियाँ एक छटाक भी जब मरहम बनकर सहलाती है कविता तब मेरे घाव को। चलते-चलते जीवन-पथ पर छला जाता हूँ जो कभी कही, किसी साथी से अपने देती है नव-गति हमेशा कविता ही तो मेरे पाँव को। घंटों देखते सूने द्वार को नहीं बुलावा आता माँ का […]

ग़ज़ल

सोच रहा हूँ दोस्त हमारा भी तो है इंसानों में कितना ज़हर छुपा रखा है होठों के मुस्कानों में कुंभकार का चाक देखकर मन बोझिल हो जाता है जाने क्या-क्या दिख जाता है मिट्टी के सामानों में शमा रौशन होते ही ये कहाँ-कहाँ से आ जाते जल जाने की चाहत इतनी होती क्यों परवानों में […]

ग़ज़ल

वो इस कदर बरसों से मुतमइन* है जैसे बारिश से बेनूर कोई ज़मीन है साँसें आती हैं, दिल भी धड़कता है सीने में आग दबाए जैसे  मशीन है आँखों में आखिरी सफर दिखता है पसीने से तरबतर उसकी ज़बीन* है अपने बदन का खुद किरायेदार है खुदा ही बताए वो कैसा मकीन* है ज़िंदगी मौत […]

मैं हिंदी हूँ

एक दिन का पर्व नहीं मैं तो युगों का गर्व हूँ, बचपन की किलकारी से मां की लोरी तक, अलौकिक प्रेम के अनकहे शब्द हूँ। मां की चिंता हूँ ,पिता का दुलार हूँ, भाई का आश्वासन ,बहन का संसार हूँ। मैं एक भाषा नही मैं तो एक परिवार हूँ। मैं वह संपर्क हूँ जो मन […]

हिंदी से कैसा द्वेष?

राग-रंग की भाषा हिंदी सक्षम-अक्षम की आशा हिंदी हिंदी सबकी शान है हिंदी से हिन्दुस्तान है मेरे गाने से क्योंकर क्लेश है? हिंदी फैली दूर तलक ईर्ष्या -द्वेष क्यों नाहक इसका अपना इतिहास पुरातन पूजता रहता इसको जन-मन विस्मित सारा परिवेश है। हिंदी ने किसी से बैर न माना जो आया उसे अपना जाना सबको […]

देश की पीढ़ी नयी तैयार करता हूँ

देश की पीढ़ी नयी तैयार करता हूँ । इस तरह मैं स्वयं का उद्धार करता हूँ । जो कभी उड़के गगन को छू नहीं पाते, उन परिंदों के परों में धार करता हूँ । टिमटिमाये ही बिना जो डूब जाते कल, उन सितारों से जहां उजियार करता हूँ । फूल, जो जाते बिखर वनफूल-सा, उनका […]

समाज को दिशा दिखाती कविताओं का संकलन : अतीत के झरोखे से

डॉ. किरण सोनी जी एक सफल एवं लोकप्रिय अध्यापिका हैं। कवियत्री तो वह बचपन से ही हैं क्योंकि बाल्यकाल से ही कविता लेखन कर रही हैं यह अलग बात है कि पाठकों के बीच उनकी कविताएं पहली बार इस कविता संग्रह ‘अतीत के झरोखे से’ के माध्यम से पहुँच रही हैं। किरण जी की भाषा […]