Description
अदम गोंडवी (वास्तविक नाम रामनाथ सिंह) हिंदी ग़ज़ल के एक अत्यंत सशक्त और क्रांतिकारी हस्ताक्षर हैं, जिन्होंने ग़ज़ल को ‘माशूक के जलवों’ से निकालकर आम आदमी की पीड़ा, भूख और संघर्ष से जोड़ा। उत्तर प्रदेश के गोंडा जनपद के परसपुर (गजराज पुरवा) में जन्मे अदम गोंडवी को दुष्यंत कुमार के बाद हिंदी ग़ज़ल की दुनिया में जनवाद और प्रतिरोध का सबसे बड़ा स्वर माना जाता है। उनकी शायरी में ग्रामीण यथार्थ, दलित चेतना और राजनीतिक पाखंड के खिलाफ तीखा आक्रोश दिखाई देता है, जो उनके प्रसिद्ध संग्रहों ‘धरती की सतह पर’ और ‘समय से मुठभेड़’ में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।अदम की भाषा कबीर, नागार्जुन और धूमिल की परंपरा की सादगी और तल्खी लिए हुए है, जो सीधे सत्ता के केंद्रों और व्यवस्था की विसंगतियों पर प्रहार करती है। अपनी फकीराना जीवनशैली, साधारण पहनावे (धोती-कुर्ता) और बेबाक अंदाज़ के कारण वे एक ‘जैविकी जनकवि’ के रूप में विख्यात हुए, जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से मानवता के दर्द और माटी की सोंधी गंध को वैश्विक पहचान दिलाई। 18 दिसंबर 2011 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी ग़ज़लें आज भी जन-आंदोलनों में मशाल की तरह काम करती हैं।






Reviews
There are no reviews yet.