Description
‘चिंबोरेयुद्ध’ मूल मराठी लेखक बालासाहेब लबडे की एक महत्त्वपूर्ण व्यंग्यात्मक और प्रतीकात्मक कृति है, जिसका संवेदनशील हिन्दी अनुवाद गोरख थोरात ने किया है। यह उपन्यास समुद्री जीव ‘चिंबोरे’ (केकड़े) की दृष्टि से मनुष्य, समाज, राजनीति, पर्यावरण और बदलती सभ्यता के अंतर्विरोधों का सशक्त चित्र प्रस्तुत करता है। पुस्तक में कल्पना, लोकजीवन, हास्य और तीखे व्यंग्य का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है, जिसके माध्यम से सत्ता-लोलुपता, सामाजिक विसंगतियों, मानवीय संवेदनहीनता तथा प्रकृति के दोहन पर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। प्रतीकों और बिंबों से समृद्ध यह रचना पाठक को केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि आत्ममंथन के लिए भी प्रेरित करती है।






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