भव्यता से मनाया गया सर्व भाषा ट्रस्ट का दूसरा वार्षिकोत्सव

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भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन के लिए समर्पित संस्था सर्व भाषा ट्रस्ट का दूसरा वार्षिकोत्सव बड़े ही भव्य तरीके से गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित किया गया। वार्षिकोत्सव में देश के विभिन्न अंचलों से लगभग 24 भाषाओं के साहित्यकारों, भाषाविदों, चित्रकारों व अन्य विभूतियों को सम्मानित किया गया।
वार्षिकोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर मार्तण्ड पुरी ने अपने वक्तव्य में कहा किसाहित्य संन्यास होता है और साहित्यकार संन्यासी। साहित्यकार राग-दोष से मुक्त समाज का सच्चा निर्माता होता है। अपने अध्यक्षीय भाषण में सर्व भाषा ट्रस्ट के अध्यक्ष व वरिष्ठ साहित्यकार श्री अशोक लव ने सर्व भाषा मंदिर की संकल्पना को व्यक्त करते हुए सभी भाषा के साहित्यकारों का आह्वान किया और सर्व भाषा ट्रस्ट की कल्पना को भारत की आत्मा बताते हुए सहयोगियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन व सुश्री रिया द्वारा की गई माँ सरस्वती की प्रार्थना से हुई। अपने स्वागत भाषण में सर्व भाषा ट्रस्ट के समन्वय केशव मोहन पाण्डेय ने ट्रस्ट के कार्यों की विस्तृत जानकारी दी तथा आगामी योजनाओं को प्रस्तुत किया। उन्होंने घोषणा की कि इस वर्ष से सर्व भाषा ट्रस्ट द्वारा देश के विभिन्न अंचलों में लगभग हर महीने समसामयिक विषयों पर परिचर्चा आयोजित की जाएगी।

प्रथम सत्र में बतौर विशिष्ट अतिथि शिक्षाविद और साहित्यकार रेणु हुसैन ने साहित्य और भाषा के समन्वय रूप के लिए बधाई देते हुए सर्व भाषा ट्रस्ट के कार्यों को भारतीय विचारधारा को मज़बूत करने वाला कार्य बताया।


सर्व भाषा ट्रस्ट के वार्षिकोत्सव में लगभग 82 विभूतियों को विभिन्न सम्मानों से सम्मानित किया गया। महामंडलेश्वर जी को ‘राष्ट्र रत्न 2019’ से अलंकृत किया गया तो प्रेरक कार्यों के लिए रोमी शर्मा, चंद्रकला मिश्रा और डाॅ. प्रभा कुमारी को ‘सुषमा स्वराज नारी गौरव सम्मान’ दिया गया। श्रेष्ठ साहित्य संस्था सम्मान इस वर्ष पचास वर्षों से सेवा करती ‘साहित्य सभा कैथल’ को सम्मानित किया गया। ‘सर्व भाषा हरियाणवी लेखक सम्मान’ कृष्णा बाछल को तथा ‘माता चंपा देवी राष्ट्रीय कला सम्मान’ कौशलेश पाण्डेय, पवन वर्मा व डाॅ. कुमुद सिंह को दिया गया। पं. बनारसी पाण्डेय स्मृति सम्मान यशस्वी साहित्यकार डाॅ. अशोक द्विवेदी को दिया गया।


इसके पूर्व हास्य-व्यंग्य कवि केवल कुमार केवल की डोगरी पुस्तक ‘कैसा बेल्ला आया ऐ’ डॉ किरण सोनी की पुस्तक ‘अतीत के झरोखे से’, आशु शर्मा की पुस्तक ‘नाराते’ व यशपाल निर्मल की पुस्तक ‘छुट्टियां’,’ मक्खन-मखाने’ व ‘असली वारिस’ का लोकार्पण हुआ।
सम्मानों में ‘रामकृष्ण त्यागी स्मृति कथा सम्मान’ अनिता रश्मि को ‘दयावती त्यागी स्मृति सरस्वती सम्मान’ डाॅ. शुभदा पाण्डेय, श्याम सिंह त्यागी स्मृति हिंदी सेवा सम्मान’ डाॅ. प्रदीप उपाध्याय को ‘राजवती त्यागी स्मृति जीवन-गौरव सम्मान’ सोनू तँवर को तथा ‘सर्व भाषा पत्रकारिता सम्मान’ प्रियरंजन झा और रविशंकर मिश्र को दिया गया।

उसके पहले 14 विभूतियों को ‘सर्व भाषा सम्मान’ दिया गया जिसमें प्रवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता व विचारक अजीत सिंह, ललित ग्रोवर, अशोक श्रीवास्तव, डाॅ. हरीश झंडेई, नाट्य मंच रंगश्री के निदेशक व रंगकर्मी महेंद्र प्रसाद सिंह, डाॅ. मुन्ना के पाण्डेय, कुलदीप श्रीवास्तव, राजीव उपाध्याय, राकेश श्रीवास्तव, डाॅ. राजेश कुमार ‘माँझी’, शशि रंजन मिश्र, पंकज कुमार बसंत, पूजा बहार थे। 24 को ‘सर्व भाषा सेवा सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यशपाल निर्मल, केवल कुमार केवल, तरुणा पुंडीर, इंदुमति मिश्र, मधु त्यागी, मुकेश यादव, डाॅ. मनोज तिवारी, आभा जैन, भावना मिलन अरोड़ा, सुनील कुमार सिन्हा, जयशंकर प्रसाद द्विवेदी, केशी गुप्ता, सुश्री श्वेता, विजय प्रकाश भारद्वाज, राजेश भंडारी ‘बाबू’, कविता पुंडीर, डाॅ. किरण सोनी, प्रदीप कुमार पाण्डेय, पूनम मिश्रा, अमित कुमार पाण्डेय।


भोजपुरी साहित्य के लिए ‘पं. धरीक्षण मिश्र साहित्य सम्मान’ डाॅ. सुमन सिंह, अनिल पाण्डेय ‘अकेला, कौशल मुहब्बतपुरी व सुशांत शर्मा को दिया गया तो संस्कृत साहित्य के लिए ‘पं. अर्जुन तिवारी साहित्य सम्मान’ डाॅ. फिरोज और प्रकाश रंजन मिश्र को दिया गया। कुमाउँनी भाषा के लिए ‘गिरीश तिवारी गिर्दा साहित्य सम्मान’ पूरन चंद्र कांडपाल , खुशालसिंह खनी, ज्ञान पंत, भुवन विष्ट और नीलम पाण्डेय ‘नील’ को दिया गया। हिंदी भाषा के लिए सूर्यकांत त्रिपाठी निराला साहित्य सम्मान’ कल्पना मनोरमा, डाॅ. बसुन्धरा उपाध्याय, आनंद प्रकाश शर्मा, डाॅ. उषा किरण, सर्वेश तिवारी ‘श्रीमुख’, डाॅॅ. आरती पाठक, बसंत कुमार शर्मा, शालिनी शर्मा, मनीष शुक्ल, डाॅ. किरण सोनी, लिली मित्रा, राजेंद्र श्रीवास्तव, डाॅ. श्याम बिहारी मिश्र और डाॅ. गरिमा संजय दुबे को दिया गया।


कार्यक्रम का संचालन तरुणा पुंडीर जी के निर्देशन में प्रदीप पाण्डेय, पारुल पाण्डेय, श्वेता व भावना मिलन अरोड़ा ने किया। इंदुमति मिश्रा, जे पी द्विवेदी, केशी गुप्ता, यशपाल निर्मल, आभा जैन, मुकेश यादव ने मंच का पाश्र्व संचालन किया। सर्व भाषा ट्रस्ट की सचिव रीता मिश्रा व और वरिष्ठ उपाध्यक्ष मधु त्यागी जी व सुनील सिन्हा जी ने अंत में सभी आगंतुकों और आयोजन के सहयोगियों अमित कुमार पांडेय, प्रभात पब्लिशिंग हाउस, भोजपुरी संगम, मेल वेल स्टूडियो और अन्य के प्रति आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

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