नेताजी और जनता

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नेताजी का भ्रमण था
हो रहा हल्ला था
लोग अपनी समस्या
बता रहे थे
नेताजी सबका हल
दे रहे थे

नेताजी मैं बेरोजगार हूँ।
मेरी नैया पार लगाओ।
बेटा , तेरे पास मोबाइल कौनसा है
कीपैडवाला
जमाना बदल गया बेटा
एनरॉईड मोबाइल खरीद
नैया ते्री मोबाइल में अटकेगी
अौर बेरोजगारी दिखाई ही न देगी

नेताजी मेरी बकरी खो गई है
कुछ रहम कीजिए
भैया कौन से रंग की थी
लाल काली या सफेद
नेताजी काली
कल हमारी गोट पार्टी में
तूने भी तो खाई थी
तेरी जबान अौर पेट को
समझ नही आई थी

नेताजी मेरी फसल नष्ट हो गई
सब चौपट हो गया है
खाने को दाना नही है
बेटा, दाने दाने पे लिखा है
खाने वाले का नाम
तू चिंता मत कर
जरुर आयेगा अौर तू खायेगा
हम न सही पर
दाना तो लिखा पढा है
क्या तूने अपने घर का
पता दे रखा है

नेताजी, बेटी की शादी है
दहेज की मारामारी है
रुपयों का संकट भारी है
तुमसे छुपी न लाचारी है
बेटा हम आशीर्वाद देने
पुलिस बल के साथ आयेंगे
दहेज लेने देने वालों को जेल पहुँचायेंगे
क्या कानून को खिलौना समझ रखा है

***
डॉ विनोद नायक
नागपुर

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