हिन्दी कै

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सुर-ताल आ चाल बदल के

ठाँव बतावें हिन्दी कै॥

सत्तर सांतर बत्तीस बेंवत

भाव बतावें हिन्दी कै ॥

 

जे जे जान लगवलस एहमे

सभके मान जगवलस एहमे

ओकरै छाती दाल दरै के

दाँव बतावें हिन्दी कै ॥

 

सबके माल मलाई आपन

मीटिंग सिटिंग संगे ज्ञापन

लोक राग भाषा बोली कै

नाँव बतावें हिन्दी कै ॥

 

बूढ़-पुरनियन के करनी पर

चाटन-बाटन सब चरनी पर

भूसा संगे खरी सउन के

गाँव बतावें हिन्दी कै ॥

 

पीयत घीव ओढ़िके चदरी

बेमौसम हौ फाटल बदरी

बनिहें भाफ करम कै पानी

पाँव बतावें हिन्दी कै ॥

 

लूट मचल हौ सम्मान कै

भाग जगल हौ बईमान कै

ढेरै ज़ोर जुगाड़ू उहवों

छांव बतावें हिन्दी कै ॥

  • जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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