सर्व भाषा ट्रस्ट द्वारा ‘पं. धरीक्षण मिश्र साहित्य सम्मान 2018’ का आयोजन

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कुशीनगर । सर्व भाषा ट्रस्ट , नई दिल्ली द्वारा गत 23 मार्च को भोजपुरी साहित्यकारों के लिए ‘पं. धरीक्षण मिश्र साहित्य सम्मान 2018’ का आयोजन किया गया। उक्त समारोह में बतौर मुख्य अतिथि विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी ने अपने सम्बोधन में कहा कि रचनाकार को वही लिखना चाहिए जो उसके दिल में आए। उसे शब्दकोष की तलाश नहीं करनी चाहिए। वही रचना प्रभावी होती है जो लेखक को ऊंचाई प्रदान करती है। पं. धरीक्षण मिश्र में यह गुण था। कहा कि सम्मान से चेतना पैदा होती है। रचना की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। नवीनता रहने से रचना जीवंत रहती है।


कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन कर हुआ। मुख्य अतिथि सहित अतिथियों का स्वागत सर्व भाषा ट्रस्ट के समन्यवक केशव मोहन पाण्डेय ने अंग वस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर किया। विशिष्ट अतिथि पं. धरीक्षण मिश्र के पौत्र कैलाश नाथ मिश्र ने भोजपुरी कवि के जीवन से जुड़े संस्मरणों को सुनाते हुए कहा कि वह जीवन में कभी किसी के आगे नहीं झुके और सदा भोजपुरी को समृद्ध बनाने के लिए लिखते रहे। एपीएन न्यूज़ के मैनेजिंग एडिटर विनय राय ने समाज को बदलने में साहित्यकारों की भूमिका को बताते हुए उनका हर प्रकार से सहयोग करने की बात की। मुजफ्फरपुर के साहित्यकार डॉ. ब्रज भूषण मिश्र ने भोजपुरी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की माँग उठाई। डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’ ने पं. धरिक्षण मिश्र को महान साहित्य सेवी बताया और कहा कि साहित्य को भोजपुरी भाषा के माध्यम से आम लोगों तक आसानी से पहुँचाया जा सकता है।

डॉ. वेद प्रकाश पांडेय ने समाज मे निरन्तर साहित्य सृजन में योगदान देने की जरूरत पर बल दिया । कहा कि साहित्य दिल की फीलिंग का मूर्त रूप होता है । प्राचार्य डॉ. अमृतांशु कुमार शुक्ल ने सर्व भाषा ट्रस्ट द्वारा सभी भाषाओं के युवा साहित्यकारों के प्रोत्साहन के कार्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि आज भाषावाद की वैमनस्यता को प्यार व सम्मान से ही खत्म किया जा सकता है। इस उद्देश्य में ट्रस्ट की सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दी । डॉ. नीलेश मिश्र व राकेश श्रीवास्तव ने स्व. अवधेश तिवारी को याद करते हुए कहा कि उनके व्यक्तित्व को आत्मसात करने का संकल्प से ही बहुत सारी समस्याओं का समाधान हो जाता है । अतः उनकी सच्ची श्रद्धांजलि उनके आदर्शों पर चलना है । अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार आरडीएन श्रीवास्तव ने किया। सर्व भाषा के कुशीनगर प्रभारी व आयोजक आलोक कुमार तिवारी द्वारा संचालन किया गया।


सर्व भाषा ट्रस्ट के समन्वयक  केशव मोहन पांडेय ने अतिथियों का स्वागत किया। जर्नलिस्ट वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन व नवप्रभा मंच कुशीनगर द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य के लिए अशोक लव, डॉ. वेद प्रकाश मिश्र, अजय कुमार शुक्ल, डॉ शुभलाल, राजेश शुक्ल, मनीष मिश्र, अभिषेक सिंह, लेफ्टिनेंट वेद प्रकाश मिश्र, ओमप्रकाश जायसवाल व दिव्येन्दु मणि त्रिपाठी को ‘अवधेश तिवारी स्मृति पूर्वांचल रत्न सम्मान 2019’ से सम्मानित किया। भाषायी, साहित्यिक व सांस्कृतिक उत्थान के लिए डॉ. ब्रजभूषण मिश्र व डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’ को ‘पं. बनारसी पांडेय स्मृति सम्मान 2019’ से सम्मानित किया गया।

सम्मानों के क्रम में बीरेंद्र कुमार मिश्र, जंकदेव जनक, जयशंकर प्रसाद द्विवेदी, जलज कुमार अनुपम, डॉ. राजेश कुमार ‘माँझी’, गुलरेज शहजाद, सरोज सिंह, श्रीभगवान पाण्डेय, जगदीश खेतान, शुभनारायन  सिंह ‘शुभ’ व अवधकिशोर ‘अवधू’ को  उनकी पहली साहित्यिक कृति के लिए ‘पं. धरीक्षण मिश्र साहित्य सम्मान 2018’ से सम्मानित किया गया। आलोक कुमार मिश्र, व्यास सूरज मिश्र, अविनाश प्रकाश द्विवेदी, डॉ. दुर्गा चरण पाण्डेय व ज्योति मिश्रा को विशिष्ट सम्मान तथा ‘सर्व भाषा’ पत्रिका के सलाहकार संपादकों नवीन पाण्डेय व डॉ. विवेक कुमार पाण्डेय को ‘सर्व भाषा सम्मान 2018’ और उमेश पटेल ‘श्रीश’, डॉ. विन्दा पाण्डेय, अनवर शमीम, निशा राय, रमापति रसिया, दिनेश तिवारी ‘भोजपुरिया’, प्रेमनाथ मिश्र, आकाश महेशपुरी व शिवनंदन जायसवाल आदि कवियों को सम्मान पत्र से सम्मानित किया गया। इससे पहले अतिथियों ने जगदीश खेतान द्वारा लिखित पुस्तक ‘दूना बाबा’ का लोकार्पण भी किया।


कार्यक्रम के अंतिम सत्र में काव्यपाठ का आयोजन किया गया। सर्व भाषा ट्रस्ट, जर्नलिस्ट्स वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन उ. प्र. व नवप्रभा मंच कुशीनगर के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन में कवियों ने समसामयिक मुद्दों को इपनी रचनाओं के माध्यम से उकेरने का काम किया। इस अवसर पर शिद्दत के साथ भोजपुरी के प्रसिद्ध कवि पंडित धरीक्षण मिश्र के साथ ही वरिष्ठ पत्रकार अवधेश तिवारी को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि भी दी गयी।


कवि सम्मेलन का शुभारंम्भ करती हुई कवियत्री निशा राय ने – ‘ए सी कूलर से सजल खिड़की रोशनदान, खोजत बिया आसरा गौरइया नादान को सुनाकर तालियाँ बटोरी। प्रेमनाथ मिश्र ने – ‘वोट दीआई तब्बे त बनी मन माफिक सरकार’ को सुनाया। आकाश महेशपुरी ने- ‘मगर ये तारीखों पर तारीख खलती है मोहब्बत में।’ रामपति रसिया ने- ‘भाषा भोजपुरी हमार,उजियार सजी भसवन से लागे।’ अनवर शमीम ने- ‘कौन छू जाता है कौन है यह, खुशबू की हवा है कौन है यह’। डॉ विन्दा पांडेय ने- ‘मोर गोदिया जे खेलल ओल्हा-पाती, काँच- पाक फलवा तुरल संघ ले सँघाती।’ दिनेश तिवारी ‘भोजपुरिया’ ने ‘भाई बटइले का भइल, मइये बंटा गइल।’ डॉ. उमेश कुमार पटेल ‘श्रीश’ ने- ‘कोइलरी के जब गीत सुनाइल, समझ तब फगुआ नियराइल।’ नेपाल से आये कवि शिवनन्दन जयसवाल ने- ‘कहाँ गइल जौ चना के सतुआ, कहाँ गइल मडुवा कोदो’ व अध्यक्षता कर रहे आर डी एन श्रीवास्तव ने ‘सदभावना के बात तू  त करिह न कबो, सदभावना के तू त कबुरगाह हो गइल’ को सुनाकर राजनीतिक मसलों, बदलते सामाजिक परिवेश व पर्यावरण की समस्या को उकेरने का प्रयास किया।

यहाँ कवियों के साथ ही अरुण पांडेय, विकेश पाण्डेय, माया शर्मा व अभिमन्यु पांडेय को सर्व भाषा ट्रस्ट के समन्वयक केशव मोहन पांडेय, राष्ट्रीय संगोष्ठी निदेशक सुनील सिन्हा व वेब संपादक जयप्रकाश द्विवेदी द्वारा सम्मानित किया गया। संचालन जर्नलिस्ट्स वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन उ. प्र. के महासचिव, नवप्रभा मंच कुशीनगर के अध्यक्ष व ट्रस्ट के कुशीनगर प्रभारी आलोक तिवारी ने किया व आभार ज्ञापन जयप्रकाश द्विवेदी द्वारा किया गया। इस दौरान  कन्हैया तिवारी, धीरज शुक्ल, सुनील मिश्र,अभिषेक सिंह, विजयशंकर गुप्ता, विजय मिश्र, विशाल त्रिपाठी, मुकेश सिंह, राजू  गुप्ता, ज्योति मिश्रा, आस्था पांडेय, सिधुजा तिवारी, हरिओम मिश्र, इंद्र, रवि पाठक आदि मौजूद रहे।

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