लघुकथाएं ‘फिलर’ नहीं ‘पिलर’ – सुरेश कुशवाह तन्मय

भोपाल के दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि सभागार में लघुकथा शोध केंद्र भोपाल द्वारा “लघुकथा टाइम्स” मासिक समाचार पत्र के दूसरे अंक के लोकार्पण एवं लघुकथा गोष्ठी में सुरेश कुशवाह तन्मय ने कहा कि वर्तमान समय में लघुकथा साहित्य की अन्य विधाओं की तुलना में आज तेजी से लोकप्रिय हुई है। इस अवसर पर डॉ. मोहन तिवारी आनन्द, निदेशक तुलसी साहित्य अकादमी मुख्य अतिथि तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. विमल शर्मा, श्री महेश सक्सेना निदेशक बाल साहित्य शोध संस्थान मध्यप्रदेश भोपाल, श्रीमती कान्ता राय सम्पादक “लघुकथा-टाइम्स” उपस्तिथ थे। माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यर्पण एवम अतिथियों के स्वागत के पश्चात श्रीमती कान्ता राय ने सरस्वती वंदना तथा स्वागत उदबोधन देते हुए लघुकथा शोध केंद्र की गतिविधियों, आगामी योजनाओं, एवम “लघुकथा टाइम्स” अखबार के प्रकाशन पर महत्वपूर्ण विचार रखे। इसके बाद लघुकथा गोष्ठी में महिमा वर्मा ने ‘पानी गये न उबरे’, मेघा मैथिल ने ‘भाग्यवान कौन’ प्रांजल श्रीवास्तव ने ‘सवाल’ सुरेश कुशवाह ने ‘चौकीदार’ अशोक व्यास ने ‘अकेलापन’ डॉ जयजय राम आनन्द ने ‘सीख’ डॉ. विमल शर्मा ने ‘तीर कमान’ नीना सिंह सोलंकी ने ‘हत्या’ कपिल शास्त्री ने ‘भविष्य वाणी’ डॉ गिरजेश सक्सेना ने ‘बाजी’ रचनाओं का पाठ किया इसके साथ ही दयाराम वर्मा,मधुलिका सक्सेना,डॉ वर्षा चौबे,कान्ता रॉय,घनश्याम अमृत,सरिता बाघेला, राजुरकर राज, शशि बसल, मुज्जफर इकबाल सिद्दीकी, नीता सक्सेना, सुनीता प्रकाश, उषा सोनी,सुमन ओबेरॉय, मृदल त्यागी ने भी अपनी उत्कृष्ट लघुकथाएं प्रस्तुत की। इस अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी अशोक बुलानी, अशोक धमेनिया एवम अर्जुन दास खत्री, साहित्यकार, सम्पादक ‘रजत-पथ’ पत्रिका विशेष रूप से उपस्तिथ थे। संचालन दायित्व सुरेश कुशवाह तन्मय द्वारा निर्वहन किया।                 साभार : रंग संस्कृति

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Name and email are required