आउ बढि चलू

एक दृढ़ उद्घोष संग
आउ बढि चलू

नीरव नभ कैं नीलिमा लै
चान के शीतलता ,
वायु के मादकता संग
तीक्ष्णता के पार चलू ।
आउ बढि चलू ।

सागर कैं कलकल ,
निर्झर कैं उनमत्त्ता ,
पर्वत के ऊंचाइ नांघि
कटुता मेटवति चलू ।
आउ बढि चलू ।

सीख ली निश्छल शैशवतास
जीत ली ह‌दय मानवता सौं
लोलुपता स उपजल पसरल
उदासी हरैत चलू ।
आउ बढि चलू।

** बिनीता मल्लिक **

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