म्हारै गाँव

शहरां रा धुँवा में बळता मिनखं
भाजा-दौड़ी
मोकळो,अनाप-सनाप पइसौ
मिनखां रौ बैरी
जीवतौ खावै
पण इणनै कुंण बतावै
जलमियां रै पसै उणमें
ही ढुल जावै
भर-भर बौरंया
घर-घर मांय ल्यावै
पण उणनै कुंण समझावै
पगां-पोतियां,पुरखां
नै भूल जावै
बूढाँ नै टाइम
पर बाटी नी दैवे
छोड़ सगळो काज
भांत भांत रा सीरियाला मांय
आंखिया गाळे
टाबर टींगर ल्यारै ही रोवै
बैठ बापड़ा आँसू रा रैला पौवै
इण शहर मांय हेत कठै है
पण अठै गांव मांय
टाबर रै रौवण सूँ पैली बुचकारै
भूलै जरां आपरै बाळपणै री याद दिरावै
सुख सूं जीवणै रौ पाठ भणावै
शहरां रौ मिनख तौ भाटौ है
गांव तौ प्रैम सूँ जाणै गूंथयोड़ो आटौ है
शहरां वाळा लोगां नै म्हारी बातां
खारी जै’र लागती
पण आ ही है जोत जागती
गाँव मांय हुवै प्रेम-रीत री बातां
गाँव रै इतिहासा सूं भर् यौड़ा इतिहास
मरणौ बेसक है,पण अठै नीं रैवूंला
शहरां वाळो नै म्हारा घणा हूँ घणा राम-राम
अबै म्हानै विदा करावौ,म्हारै गाँव….।
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जालाराम चौधरी
बाड़मेर,राजस्थान

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