क्या चित्रों के द्वारा चिकित्सा की जाना संभव हैं ? – डॉ. अरविन्द जैन भोपाल

जन्म और मृत्यु के बीच की अवधि को आयु कहते हैं .आयु यानि शरीर ,आत्मा ,मन और इन्द्रियों के संयोग को आयु कहते हैं .और स्वस्थ्य व्यक्ति कैसे स्वस्थ्य रहे तो सबसे पहले स्वस्थ्य की परिभाषा समझनी होगी .”सम दोषः समाग्नि सम धातु मलाः क्रियाः ,प्रसन्ना आत्मेन्द्रिय मनः स्वस्थ्य इतिआधिभीयते ” यह स्वस्थ्य की परिभाषा अपने आप में अद्वितीय हैं . इसमें सिर्फ शरीर की नहीं बल्कि आत्मा ,मन इन्द्रियों की प्रसन्नता को स्वस्थ्य कहा गया हैं . यानि शरीर के साथ मन को स्वस्थ्य रखना जरुरी हैं ,यदि शरीर दुखी हैं तो उसका प्रभाव मन पर पड़ता हैं और मन दुखी हैं तो उसका प्रभाव शरीर पर पड़ता हैं .यानि शरीर और मन एक दूसरे के पूरक हैं .
रोग और चिकित्सा क्या होता हैं तो इसको समझने ,यह समझना जरुरी हैं .”रोगस्तु दोष वैषस्यम ,रोग समामयं निरोगता ” दोष धातु मल का विषम होना रोग और समान अवस्था में लाना चिकित्सा हैं .यदि कोई को ब्लड प्रेशर उच्च या निम्म हैं तो उसे रोग कहते हैं और उसे सामान्य अवस्था में लाना चिकित्सा हैं .किसी को खून की कमी हैं तो उसको खून बढ़ाने का इलाज़ देना चिकित्सा हैं .किसी का मन दुखी हैं तो उसको प्रसन्न करना चिकित्सा हैं .
चिकित्सा के कई प्रकार हैं जैसे एलॉपथी ,आयुर्वेद होमियोपैथी ,नेचुरोपैथी ,यूनानी ,सिद्ध ,रस चिकित्सा. ज्योतिषी ,,रत्न ,मनो चिकित्सा .रंग चिकित्सा .फूल चिकित्सा , खुशबु चिकित्सा ,स्पर्श चिकित्सा, हाइड्रो चिकित्सा , संगीत चिकित्सा इत्यादि अनेकों चिकित्सा पद्धत्ति चलन में हैं .इसका मात्र उद्देश्य शरीर में कोई घटक कम या अधिक हैं उन्हें सामान्य अवस्था में लाना हैं इसी प्रकार कोई व्यक्ति दुखी हैं उसके दुःख से हटाकर प्रसन्नता में लाना मनो चिकित्सा हैं .
एक बात और आवश्यक हैं की संसार में जितनी भी वस्तुएं ,सामग्री हैं सब औषधि हैं इसके अलावा कुछ नहीं .उदाहरण स्वरुप वर्तमान में ठण्ड हैं तो इस समय गरम कपडे ,पल्ली अंगीठी ,दरवाजा खिड़की का बंद रखना हमारे लिए औषधि का काम कर रही हैं .जैसे हम कोई मीटिंग कर रहे हैं और वहां कुर्सी न हो तो हमें कुछ परेशानी या असहजता महसूस होंगी यह असहजता ही रोग हैं और कुर्सी हमें आराम दे रही हैं तो उस समय कुर्सी हमारे लिए औषधि का काम करती हैं . यदि कोई व्यक्ति दुखी हैं ,मानसिक कष्ट हैं उसको हमने कुछ अच्छी सलाह दी या उसका चुटकलों के द्वारा मन में प्रसन्नता ला दी वह उसके लिए इलाज हो गया .
जैसे अनेकों चिकत्सा का वर्णन किया उनमे चित्र कला भी एक चिकित्सा होती हैं . एक राजकुमार कुछ दिनों से बीमार था ,उसका शरीर स्वस्थ्य पर मन में उदासी .कई चिकित्सकों को बुलाया गया .पर उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा .इतने में उससे से छोटा एक बालक आया और उसने रजुमार का ऊंटपटांग चित्र बनाया जिसे देखकर राजकुमार खूब हंसा और हँसते हँसते लोटपोट हो गया और उसकी उदासी दूर हो गयी. इसमें उस बालक के चित्र ने उसके लिए इलाज का काम लिया .
कोई कोई बहुत संवेदनशील होते हैं ,कुछ एकाकी जीवन व्यतीत करना चाहते हैं या कोई लेखक असामाजिक हो जाते हैं जैसे समाज से दूर .इसका यह मतलब नहीं की वे रोग ग्रस्त हैं .नहीं .उनको एकाकीपन में या लेखन में ,चिंतन मनन में सुख की अनुभूति होती हैं . बहुत ऐसे भी कलाकार ,,पेंटर ,चित्रकला पारखी हुए हैं जिन्होंने कला को ही अपनी जीवन शैली मानी और उसमे डूब कर अच्छी कृतियां बनाई जिसके कारण अन्य लोगों को प्रेरणा मिली .इसका मतलब उनकी पेटिंग्स से दूसरों को उत्साह वर्धन हुआ यही तो हैं चिकित्सा .
आज भी बहुत से लोग मात्र पेटिंग्स ,चित्रों को देखने खजुराहो ,अजंता ,ऐलोरा ,पैंटिंग्स म्यूजियम जाते हैं और प्रकृति के साथ जुड़ कर कुछ लोग पेटिंग्स बनाकर अपने मानसिक दुखों से मुक्त होते हैं और उनको जीने की नयी दिशा मिलती हैं और अन्यों को प्रेरित कर उनके आदर्श बन जाते हैं .इसीलिए चिकित्सा किसी पद्धति से नहीं बंधी हैं ,,चिकित्सा फिल्म ,साहित्य ,संगीत ,नाटक ,कलाकारी से भी की जासकती हैं यह व्यक्ति की संवेदन पर निर्भर करती हैं .दुखी मन मस्तिष्क का विचलन करना या होना उसके लिए चिकित्सा हो सकती हैं ,चिकित्सा में मन की स्थिति के साथ शरीर की प्रकृति का भी अवलोकन करना होता हैं .कभी कभी भय का भी उपयोग चिकित्सा में किया जाता हैं .एक हृदय रोगी जिसका ऑपरेशन होना हैं उसे हर समय यह अनुभूति होती थी की यदि ऑपरेशन के दौरान उसकी मृत्यु हो जाती हैं तो उसकी बिटिया की शादी कैसे होंगी .?यह बात डॉक्टर ने कई बार सुनी तो एक दिन गुस्से में बोले की तुम मर जाओ फिर बिटिया की शादी और धूमधाम से करेंगे .इतने बोलने से मरीज़ का मन भय ग्रस्त होने के बाद मानसिक संतुलन बदला और उस भ्रम से मुक्त हुआ .
इसलिए संसार कीप्रत्येक वस्तु औषधि हैं .हम जंगलों में बगीचों में ,जाते हैं वहां पर ऐसी अनेक पेड़ ,पौधे होते हैं जिनको हम नहीं जानते पर वे सब औषधियां हैं .हमारी बातचीत ,हंसना ,मौज मस्ती ,घूमना फिरना ,खरीदी करना ,बिना मतलब के गुनगुनाना ,नाचना ,चित्रकारी ,शिल्पकारी ये सब मानसिक तनाव को दूर करने के साधन हैं .
चित्रकारी से मनुष्य में एकाग्रता आती हैं ,मन की उलझन से दूर होकर रंगों का चुनाव ,अपनी कल्पनाशक्ति को नयी दिशा देने से वह अपने मानसिक और शारीरिक दुखों से क्षणिक दूर होकर व्याधिमुक्ति का अहसास करता हैं .इसलिए हर मानव को अपने व्यवसाय नौकरी के अलावा एक ऐसा शौक पालना चाहिए चाहे समाज सेवा हो या चित्रकारी .
*********

डॉक्टर अरविन्द जैन

संस्थापक शाकाहार परिषद्, भोपाल

09425006753

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Name and email are required